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Original Article
The role of the media in disseminating information about government schemes for the marginalized sections (persons with disabilities) of Chhattisgarh
छत्तीसगढ़
के उपेक्षित
वर्गों
(दिव्यांगजन) के
लिए संचालित
सरकारी
योजनाओं के
प्रचार-प्रसार
में मीडिया की
भूमिका
|
Satyapal
Singh Rajput 1*, Dr. Santosh Kumar 2 1 Researcher, Department
of Journalism and Mass Communication, Shri Shankaracharya Professional
University, Bhilai, Chhattisgarh, India 2 Assistant Professor, Department of
Journalism and Mass Communication, Shri Shankaracharya Professional
University, Bhilai, Chhattisgarh, India |
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ABSTRACT |
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English: The objective of this research paper is to study the role of the media in disseminating information about government schemes designed for marginalized groups, such as persons with disabilities, in the state of Chhattisgarh. Specifically, this research analyzes the role of regional news channels—News 24 and IBC 24. The study is based on data collected from 400 respondents in Raipur district (comprising 200 persons with disabilities and 200 individuals from the general public/senior citizens) using a structured questionnaire. Additionally, secondary data obtained from the Chhattisgarh Government's Administrative Report (2023–24) was utilized. The study reveals that the media has made significant contributions regarding information about schemes, awareness of rights, social acceptance, and economic empowerment. The regular reporting, special programs, and on-the-ground coverage by News 24 and IBC 24 have expanded the reach of these schemes to both rural and urban areas. In conclusion, the media can be established as an effective and essential medium in the process of empowering persons with disabilities. Hindi: प्रस्तुत
शोध-पत्र का
उद्देश्य
छत्तीसगढ़ राज्य
में
दिव्यांगजन
जैसे
उपेक्षित
वर्गों के
लिए संचालित
सरकारी
योजनाओं के
प्रचार-प्रसार
में मीडिया
की भूमिका का
अध्ययन करना
है। विशेष
रूप से इस शोध
में
क्षेत्रीय
समाचार चैनलों-न्यूज़
24 एवं आईबीसी
24-की भूमिका का
विश्लेषण
किया गया है।
अध्ययन का
आधार रायपुर
जिले के 400
उत्तरदाता (200
दिव्यांगजन
एवं 200
सामान्य/वरिष्ठ
नागरिक) हैं,
जिनसे
संरचित
प्रश्नावली
के माध्यम से
प्राथमिक
आँकड़े
संकलित किए
गए। साथ ही
छत्तीसगढ़
शासन के
प्रशासनिक
प्रतिवेदन 2023–24
से प्राप्त द्वितीयक
आँकड़ों का
भी उपयोग
किया गया।
अध्ययन से यह
स्पष्ट हुआ
कि मीडिया ने
योजनाओं की जानकारी,
अधिकार-जागरूकता,
सामाजिक
स्वीकृति
तथा आर्थिक
सशक्तिकरण
में
महत्वपूर्ण
योगदान दिया
है। न्यूज़ 24
एवं आईबीसी 24
की नियमित
रिपोर्टिंग,
विशेष
कार्यक्रमों
तथा जमीनी
कवरेज ने
योजनाओं की
पहुँच को
ग्रामीण एवं
शहरी दोनों
क्षेत्रों
तक
विस्तारित
किया है।
निष्कर्षतः
मीडिया को
दिव्यांगजन
सशक्तिकरण
की प्रक्रिया
में एक
प्रभावी एवं
अनिवार्य
माध्यम के
रूप में
स्थापित
किया जा सकता
है। Keywords: Mass Media, Persons with Disabilities,
Government Schemes, Media Impact, News 24, IBC 24, Social Empowerment, जनसंचार
माध्यम, दिव्यांगजन, सरकारी
योजनाएँ, मीडिया
प्रभाव, न्यूज़
24,
आईबीसी
24,
सामाजिक
सशक्तिकरण |
||
प्रस्तावना
भूमिका
भारतीय
लोकतांत्रिक
व्यवस्था में
जनसंचार माध्यमों
की भूमिका समय
के साथ
अत्यधिक व्यापक
और बहुआयामी
हो गई है।
मीडिया अब
केवल सूचना
संप्रेषण का
साधन नहीं रहा,
बल्कि
सामाजिक
परिवर्तन,
जन-जागरूकता
तथा शासन और
नागरिकों के
मध्य संवाद का
सशक्त मंच बन
चुका है।
छत्तीसगढ़
जैसे राज्य
में, जहाँ
सामाजिक-आर्थिक
विविधता के
साथ-साथ दिव्यांगजन
की संख्या भी
उल्लेखनीय है,
सरकारी
योजनाओं की
प्रभावशीलता
काफी हद तक मीडिया
कवरेज पर
निर्भर करती
है।
दिव्यांगजन
के लिए पेंशन
योजना, छात्रवृत्ति,
सहायक
उपकरण वितरण,
स्वास्थ्य
एवं पुनर्वास
सेवाएँ तथा
रोजगार-उन्मुख
योजनाएँ
संचालित की
जाती हैं।
किंतु योजनाओं
का वास्तविक
लाभ तभी संभव
है जब उनकी जानकारी
समय पर और सरल
रूप में
लाभार्थियों
तक पहुँचे। इस
संदर्भ में
न्यूज़ 24 एवं
आईबीसी 24 जैसे
क्षेत्रीय
समाचार
चैनलों ने
योजनाओं के
प्रचार-प्रसार
में
महत्वपूर्ण
भूमिका निभाई
है।
अध्ययन
के उद्देश्य
1)
दिव्यांगजन
हेतु संचालित
सरकारी
योजनाओं की
जानकारी के
प्रसार में
मीडिया की
भूमिका का अध्ययन
करना।
2)
न्यूज़
24 एवं
आईबीसी 24 की
रिपोर्टिंग
के माध्यम से
जागरूकता
स्तर का
विश्लेषण
करना।
3)
मीडिया
कवरेज के
सामाजिक एवं
आर्थिक
प्रभावों का
मूल्यांकन
करना।
4)
योजनाओं
की पहुँच और
लाभ-प्राप्ति
में मीडिया की
प्रभावशीलता
का परीक्षण
करना।
शोध
पद्धति
1)
शोध
का प्रकार:
वर्णनात्मक
एवं
विश्लेषणात्मक
2)
नमूना: रायपुर
जिला, 400
उत्तरदाता
3)
उपकरण:
संरचित
प्रश्नावली
4)
डेटा
स्रोत:
· प्राथमिक डेटा – सर्वेक्षण
· द्वितीयक डेटा – प्रशासनिक प्रतिवेदन 2023–24, समाचार रिपोर्ट
5)
विश्लेषण
विधि: प्रतिशत
विधि एवं
तुलनात्मक
विश्लेषण
मुख्य
विवेचना
|
तालिका
1 |
|
तालिका 1 दिव्यांगजन
हेतु प्रमुख
योजनाओं की
जानकारी का
स्तर |
||
|
क्रमांक |
योजना
का नाम |
जानकारी
रखने वाले
उत्तरदाता (%) |
|
1 |
सामाजिक
सुरक्षा
पेंशन योजना |
81% |
|
2 |
दिव्यांग
पेंशन योजना |
74% |
|
3 |
सहायक
उपकरण वितरण
योजना |
63% |
|
4 |
स्वास्थ्य
एवं
पुनर्वास
शिविर |
59% |
|
5 |
छात्रवृत्ति
योजना |
52% |
व्याख्या
तालिका 1 के
आँकड़ों से यह
स्पष्ट रूप से
परिलक्षित होता
है कि
छत्तीसगढ़
राज्य में
दिव्यांगजन
हेतु संचालित
प्रमुख
सरकारी
योजनाओं के
प्रति जागरूकता
का स्तर असमान
है। सर्वाधिक 81%
उत्तरदाताओं
द्वारा
सामाजिक
सुरक्षा पेंशन
योजना की
जानकारी होना
यह दर्शाता है
कि यह योजना
अपनी नियमित
प्रकृति, प्रत्यक्ष
आर्थिक लाभ
तथा मीडिया
में बार-बार
उल्लेख के
कारण सबसे
अधिक चर्चित
और पहचान प्राप्त
योजना है।
इसके पश्चात 74%
उत्तरदाताओं
को दिव्यांग
पेंशन योजना
की जानकारी
प्राप्त होना
यह संकेत देता
है कि दिव्यांगजन
से प्रत्यक्ष
रूप से जुड़ी
योजनाएँ अपेक्षाकृत
अधिक प्रभावी
ढंग से
प्रचारित हो रही
हैं।
सहायक
उपकरण वितरण
योजना के बारे
में 63%
उत्तरदाताओं
की जानकारी यह
दर्शाती है कि
इस योजना का
प्रचार-प्रसार
मध्यम स्तर पर
हुआ है, किंतु अभी
भी एक बड़ा
वर्ग ऐसा है
जो इसके लाभों
से पूर्णतः
अवगत नहीं है।
स्वास्थ्य
एवं पुनर्वास
शिविरों की
जानकारी केवल 59%
उत्तरदाताओं
तक सीमित रहना
यह इंगित करता
है कि
स्वास्थ्य-आधारित
सेवाओं के
प्रचार में निरंतरता
एवं व्यापक
पहुँच की
आवश्यकता है।
वहीं
छात्रवृत्ति
योजना की
जानकारी
मात्र 52%
उत्तरदाताओं
को होना यह
दर्शाता है कि
शिक्षा से
जुड़ी
योजनाएँ
अपेक्षाकृत
कम प्रचारित हैं,
विशेषकर
ग्रामीण और
निम्न-शैक्षिक
पृष्ठभूमि वाले
दिव्यांगजनों
के बीच।
समग्र
रूप से यह
तालिका इस
तथ्य को
रेखांकित करती
है कि मीडिया
के माध्यम से
पेंशन जैसी
प्रत्यक्ष
लाभकारी
योजनाओं की
जानकारी तो
व्यापक रूप से
पहुँची है,
किंतु
शिक्षा, स्वास्थ्य
एवं उपकरण
संबंधी
योजनाओं के
प्रचार-प्रसार
को और अधिक
सुदृढ़ एवं
लक्षित बनाने
की आवश्यकता
है,
ताकि
दिव्यांगजन
इन सभी
योजनाओं का
समग्र और समान
रूप से लाभ
प्राप्त कर
सकें।
|
चित्र 1
|
|
चित्र
1 मीडिया
प्रभाव का
वैचारिक
प्रवाह-चित्र |
तालिका 2
|
तालिका 2 मीडिया
कवरेज का
सामाजिक
प्रभाव |
|
|
सामाजिक
संकेतक |
सकारात्मक
प्रभाव (%) |
|
सामाजिक
सम्मान में
वृद्धि |
64% |
|
आत्मविश्वास में वृद्धि |
66% |
|
सामुदायिक
सहभागिता |
48% |
|
अधिकार-जागरूकता |
72% |
व्याख्या
तालिका 2 के
आँकड़ों से यह
स्पष्ट रूप से
परिलक्षित होता
है कि मीडिया
कवरेज ने
दिव्यांगजन
के सामाजिक
सशक्तिकरण
में
महत्वपूर्ण
और बहुआयामी भूमिका
निभाई है।
सर्वाधिक 72%
उत्तरदाताओं
द्वारा
अधिकार-जागरूकता
में वृद्धि को
स्वीकार किया
जाना इस तथ्य
को पुष्ट करता
है कि मीडिया
ने
दिव्यांगजन
को उनके वैधानिक
अधिकारों,
सरकारी
योजनाओं तथा
सामाजिक
संरक्षण से
संबंधित
प्रावधानों
के प्रति सजग
बनाने में प्रभावी
योगदान दिया
है।
आत्मविश्वास
में 66%
की वृद्धि यह
संकेत देती है
कि मीडिया
द्वारा
प्रसारित
सकारात्मक
समाचार, सफलता की
कहानियाँ तथा
योजनाओं से
जुड़े
अनुभवों ने
दिव्यांगजन
के मनोबल को
सुदृढ़ किया
है।
सामाजिक
सम्मान में 64% की
वृद्धि यह
दर्शाती है कि
मीडिया कवरेज
के माध्यम से
समाज में
दिव्यांगजन
के प्रति दृष्टिकोण
में
सकारात्मक
परिवर्तन आया
है और उन्हें
अधिक सम्मान
एवं
स्वीकार्यता
मिलने लगी है।
वहीं, सामुदायिक
सहभागिता में 48% का
सकारात्मक
प्रभाव यह
इंगित करता है
कि यद्यपि
मीडिया ने
सहभागिता
बढ़ाने में
भूमिका निभाई
है,
फिर भी
सामाजिक
गतिविधियों
और सामुदायिक
निर्णय-प्रक्रिया
में
दिव्यांगजन
की भागीदारी
को और अधिक
सुदृढ़ करने
की आवश्यकता
बनी हुई है।
समग्र रूप से
यह तालिका इस
निष्कर्ष की पुष्टि
करती है कि
मीडिया कवरेज
ने दिव्यांगजन
के सामाजिक
सशक्तिकरण की
प्रक्रिया को
गति प्रदान की
है और समाज
में उनकी
स्थिति को सुदृढ़
बनाने में
महत्वपूर्ण
योगदान दिया
है।
तालिका 3
|
तालिका 2 मीडिया
कवरेज का
आर्थिक
प्रभाव |
|
|
आर्थिक
संकेतक |
सकारात्मक
प्रभाव (%) |
|
पेंशन
की समझ |
63% |
|
रोजगार/स्वरोजगार प्रेरणा |
52% |
|
आर्थिक
सुरक्षा का
अनुभव |
57% |
व्याख्या
तालिका
3 के
आँकड़ों से यह
स्पष्ट होता
है कि मीडिया
कवरेज ने
दिव्यांगजन
एवं उपेक्षित
वर्गों के आर्थिक
सशक्तिकरण
में भी
उल्लेखनीय
भूमिका निभाई
है। सर्वाधिक 63%
उत्तरदाताओं
द्वारा पेंशन
की समझ में
वृद्धि को
स्वीकार किया
जाना यह
दर्शाता है कि
मीडिया ने
पेंशन
योजनाओं की
पात्रता, प्रक्रिया
और नियमितता
के संबंध में
लाभार्थियों
की जानकारी को
सुदृढ़ किया
है,
जिससे
आर्थिक
सहायता
प्राप्त करने
में उन्हें
अधिक
स्पष्टता और
विश्वास मिला
है।
रोजगार
एवं
स्वरोजगार के
प्रति 52% की
प्रेरणा यह
संकेत देती है
कि मीडिया
द्वारा
प्रसारित
योजनाओं, प्रशिक्षण
कार्यक्रमों
और सफलता की
कहानियों ने
लाभार्थियों
को
आत्मनिर्भर
बनने की दिशा
में
प्रोत्साहित
किया है। इसके
साथ ही, 57%
उत्तरदाताओं
द्वारा
आर्थिक
सुरक्षा के
अनुभव की
पुष्टि यह
दर्शाती है कि
मीडिया कवरेज
ने आय के
स्थायित्व और
भविष्य की
सुरक्षा के प्रति
सकारात्मक
भाव उत्पन्न
किया है।
समग्र रूप से
यह तालिका इस
तथ्य की
पुष्टि करती
है कि मीडिया
न केवल
सामाजिक
जागरूकता का
माध्यम है,
बल्कि वह
आर्थिक समझ,
आत्मनिर्भरता
और सुरक्षा की
भावना को
विकसित कर
उपेक्षित
वर्गों के
जीवन-स्तर में
सुधार लाने का
भी एक प्रभावी
साधन बनकर
उभरा है।
निष्कर्ष
अध्ययन
से यह स्पष्ट
निष्कर्ष
निकलता है कि
न्यूज़ 24 एवं
आईबीसी 24 जैसे
क्षेत्रीय
समाचार
चैनलों ने
छत्तीसगढ़
में
दिव्यांगजन
हेतु संचालित
सरकारी योजनाओं
के
प्रचार-प्रसार
में अत्यंत
प्रभावी भूमिका
निभाई है।
मीडिया ने न
केवल योजनाओं
की जानकारी को
व्यापक बनाया,
बल्कि
सामाजिक
सम्मान, आत्मविश्वास
और आर्थिक
सुरक्षा की
भावना को भी
सुदृढ़ किया।
इस प्रकार
मीडिया को
दिव्यांगजन
सशक्तिकरण की
प्रक्रिया का
एक अनिवार्य
घटक माना जा
सकता है।
सुझाव
1)
योजनाओं
पर विशेष टीवी
कार्यक्रमों
की आवृत्ति
बढ़ाई जाए।
2)
ग्रामीण
क्षेत्रों के
लिए स्थानीय
भाषा में विशेष
प्रसारण किए
जाएँ।
3)
सहायक
उपकरणों की
गुणवत्ता एवं
समयबद्ध वितरण
सुनिश्चित
किया जाए।
4)
मीडिया-प्रशासन
समन्वय को और
सुदृढ़ किया
जाए।
भविष्य
हेतु सुझाव
1)
डिजिटल
मीडिया और
सोशल मीडिया
की भूमिका पर
पृथक अध्ययन
किया जाए।
2)
राज्य-स्तर
के साथ-साथ
जिला-स्तरीय
तुलनात्मक
अध्ययन किए
जाएँ।
3)
दिव्यांग
महिलाओं पर
केंद्रित
मीडिया प्रभाव
का विश्लेषण
किया जाए।
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